
सर्दी का एक धुंधला दिन है। इंग्लैंड के उत्तर में स्थित छोटे-से कस्बे बिलिंगहैम
में सत्रह साल की लॉरेन अपने भारी बैग के
सर्दी का एक धुंधला दिन है। इंग्लैंड के उत्तर में स्थित छोटे-से कस्बे बिलिंगहैम
में सत्रह साल की लॉरेन अपने भारी बैग के साथ बस में चढ़ती है। वह स्कूल
नहीं, एक विचार की तलाश में है। बस उसे एक घंटे से ज़्यादा दूर डार्लिंगटन के
कॉलेज तक ले जाएगी, जहां वह फ्रेंच और स्पैनिश पढ़ती है, ऐसी भाषाएं जो
उसके स्कूल ने अब पढ़ाना बंद कर दिया है।
उसका स्कूल घर से पांच मिनट की दूरी पर है, लेकिन बीस मील के दायरे में
कोई भी संस्थान अब आधुनिक भाषाओं की पढ़ाई नहीं कराता। इसलिए वह रोज़
दो घंटे का सफ़र करती है, सिर्फ़ इसलिए कि एक ऐसी कक्षा में बैठ सके जहां
शब्द अब भी जीवित हैं। जहां फ्रेंच की क्रियाएं और स्पैनिश की वाक्य-रचना
अभी तक किसी मशीन ने निगल नहीं ली है।